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नकारात्मक शक्तियों को दूर करता है यज्ञ : आचार्य चिरंजीव शास्त्री

पांचवें दिन तक 28 लाख आहुतियों से गूंजा श्री गोपाल महायज्ञ का यज्ञ मंडप

दैनिक राजस्थान समाचार प्रदीप कुमार शर्मा, गढ़टकनेत (अजीतगढ़)। ग्राम पंचायत आसपुरा स्थित ब्रह्मलीन संत रामदास महाराज की तपोस्थली धूणी धाम में चल रहे 108 कुण्डात्मक 9 दिवसीय श्री गोपाल महायज्ञ के पांचवें दिन वेद मंत्रों की गूंज से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। धूणी महंत गोपालदास महाराज के सान्निध्य एवं आचार्य पं. चिरंजीव शास्त्री के नेतृत्व में प्रतिदिन 7 लाख आहुतियां दी जा रही हैं। अब तक 108 कुंडों पर 251 यजमानों द्वारा कुल 28 लाख आहुतियां दी जा चुकी हैं।

आचार्य चिरंजीव शास्त्री ने प्रवचन में कहा कि यज्ञ नकारात्मक शक्तियों को नष्ट कर सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न करता है। यह न केवल आध्यात्मिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि वैज्ञानिक रूप से भी वातावरण को शुद्ध कर मानव स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि यज्ञ देवताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और मानसिक शांति प्राप्त करने का श्रेष्ठ माध्यम है।

महायज्ञ में 7 क्विंटल हवन सामग्री व 3.5 क्विंटल देसी घी का प्रतिदिन उपयोग किया जा रहा है। हवन सामग्री में तिल, चावल, जौ, जटा मानसी, नागरमोथा, कपूर कचरी, इंद्रजौ, अगर-तगर, देवदास, बिल्व गीट्टी, भोगपत्र और देसी चीनी जैसी पवित्र सामग्री सम्मिलित है।

151 विद्वान पंडित हवन करवा रहे हैं, जबकि मंदिर के महंत हरिदास महाराज ने बताया कि गाय का शुद्ध घी ग्रामीणों और भामाशाहों के सहयोग से एकत्र किया गया है।

मंदिर परिसर में बाहर से आए कलाकारों द्वारा विभिन्न देवी-देवताओं एवं राधा-कृष्ण की झांकियां सजाई गई हैं, जिनसे श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह में वृद्धि हुई है।

महायज्ञ के दौरान अब तक उदयपुरवाटी शाकंभरी शक्तिपीठ के महंत, दिवराला के संत किशनदास महाराज, महरौली के संत शत्रुघ्नदास महाराज, अजीतगढ़ पंचायत समिति प्रधान एडवोकेट शंकरलाल यादव, तथा मेंहदीपुर बालाजी धाम के संत लालचंद महाराज सहित कई संत-महात्माओं ने शिरकत कर यज्ञ का आशीर्वाद प्रदान किया।

प्रतिदिन दस हजार से अधिक श्रद्धालु पंगत-प्रसादी ग्रहण कर रहे हैं।

महायज्ञ में प्रतिदिन नियमित भंडारे का आयोजन हो रहा है, जिसमें दोपहर से लेकर देर रात तक श्रद्धालु पंगत-प्रसादी का लाभ ले रहे हैं।

दानदाताओं ने भी यज्ञ में बढ़-चढ़कर सहयोग दिया है। नरपत सिंह, रिछपाल सिंह और भोपाल सिंह आसपुरा ने यज्ञशाला के शिखर कलश हेतु ₹1.51 लाख, जबकि बरजी परिवार (गुलाबचंद, सुमेर, जैसाराम) ने तोरण द्वार निर्माण के लिए ₹1 लाख का आर्थिक सहयोग किया। आसपुरा सरपंच हेमकंवर द्वारा भी ₹1 लाख का सहयोग प्रदान किया गया।

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