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सनातन धर्म में आंग्ल (अंग्रेजी) नव वर्ष(०1जनवरी) को पारंपरिक रूप से नहीं मनाया जाता। क्योंकि असली नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरू होता है। डॉ सुरेश चंद शर्मा

जयपुर- सर्व समाज जागृति संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बृजवासी गौ रक्षक सेना भारत संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉक्टर सुरेश चंद शर्मा ने बताया कि सनातन धर्म में आंग्ल (अंग्रेजी)नव वर्ष(०1जनवरी) को पारंपरिक रूप से नहीं मनाया जाता,क्योंकि असली नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पाड़वा/युगाब्द) से शुरू होता है, जो सृष्टि के सृजन से जुड़ा है; लेकिन जैसा प्रचलन चल रहा है अगर कोई०1 जनवरी मनाना चाहता है। तो वे मंदिर जाकर संकल्प ले सकते हैं (जैसे गौ रक्षा,सात्विक भोजन,वृक्षारोपण, पर्यावरण की रक्षाआदि-आदि ), और इसे भारतीय संस्कृति और संस्कारों के साथ जोड़कर मना सकते हैं, जैसे बड़ों का आशीर्वाद लेना और प्रकृति का सम्मान करना, ताकि यह केवल एक बाहरी प्रथा न रहकर आत्म-सुधार का अवसर बन सके। सनातन परंपरा के अनुसार नव वर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) ही है..जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है,जो आमतौर पर अप्रैल माह में आती है। इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए यह ‘ब्रह्म संवत्’ या ‘नव संवत्सर’ कहलाता है। जब हम घरों को सजाकर, रंगोली बनाकर, आम, अशोक के पत्तों की बंधनवार , गुड़ी (ध्वज) लगाकर, और मिठाइयाँ बांटकर तथा सबके साथ मिलकर पारंपरिक अनुष्ठान के साथ मनाते हैं।
अतः स्वयं के साथ साथ दूसरों को भी अपने वास्तविक भारतीय नव वर्ष (चैत्र शुक्ल प्रतिपदा) के महत्व के बारे में बताएं और अपनी सनातन संस्कृति के मान बिंदुओं को बचाएं ।

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