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सुरक्षा मानकों की अवहेलना कर मानव जीवन से खिलवाड़ कर रहे क्रेशर, धूल मिट्टी के कणों से क्षेत्र मे बढ़ रहे सिलिकोसिस के मरीज,कौन है जिम्मेदार

दैनिक राजस्थान समाचार रुदावल भरतपुर। रुदावल क्षेत्र में संचालित क्रेशर सरकार की गाइडलाइन की पालना नही कर सरकार के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे है। वहीं सरकारी विभाग भी इन पर कार्रवाही करने के बजाय जांच के नाम पर मौके पर पहुंचकर महज कागजी पूर्ति करते हुए नजर आ रहे है। रुदावल थाना क्षेत्र के गांव गूजरबलाई के निकट आधा दर्जन से अधिक क्रेशर संचालित है। इनमें महज एक दो क्रेशर को छोड दिया जाए तो सभी सरकारी नियमों की अवहेलना करने में जुटे हुए है। अधिकतर क्रेशरों पर मजदूरों की सुरक्षा की परवाह किए बगैर ही कार्य कराया जा रहा है। इन क्रेशरों पर मजदूरों की सुरक्षा के उपकरण या तो उपलब्ध ही नही है या फिर मजदूर अपनी जान की परवाह किए ही सुरक्षा संसाधनों का उपयोग नही कर रहे है। क्रेशर मशीनरी पर कब किस मजदूर की जान पर बन आए कुछ कहा नही जा सकता है। इसके बावजूद सुरक्षा उपकरणों मास्क, हेल्मेट, दस्ताने सहित अन्य सुरक्षा उपकरणों का उपयोग नही किया जा रहा है। सरकारी आदेशों में क्रेशरों पर कार्य करने के लिए मास्क, हेल्मेट सहित जरूरी सुरक्षा उपकरणों का उपयोग किया जाना अनिवार्य है। जबकि मास्क का उपयोग क्रेशरों पर उडने वाले धूल, पत्थरों के कणों से सुरक्षा में एक व्यापक संसाधन है। वहीं हेल्मेट से किसी भी स्थिति में सिर की सुरक्षा बचाव के लिए अनिवार्य है। इन सुरक्षा उपकरणों के उपयोग से मजदूर की जान का जोखिम कम किया जा सकता है। सरकारी विभागों के उच्चाधिकारी एवं कार्मिक अगर इस ओर सख्ती दिखाते है तो संभवतया कुछ हादसों को रोका जा सकता है। रुदावल क्षेत्र का अहम पहलू देखा जाए तो इन क्रेशरों पर मजदूरों की ओर से मास्क का उपयोग नही करना घातक सिद्ध हो रहा है जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां सिलकोसिस मरीजों की संख्या बहुत अधिक है और इस बीमारी के कारण आए दिन नौजवानों की मौत तक हो जाती है।

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