
दिल्ली पीएम नरेन्द्र मोदी ने वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ पर लोकसभा में अपने संबोधन में एक ऐतिहासिक गाथा का जिक्र किया… जो यह बताता है कि वंदे मातरम्… सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत की आत्मा, स्वतंत्रता संग्राम का मंत्र, बलिदान,ऊर्जा,सात्त्विकता,त्याग और तपस्या का प्रतीक है।
1906 में, नागपुर के नील सिटी हाईस्कूल के बच्चों द्वारा एक स्वर में वंदे मातरम् बोलने पर अंग्रेजों ने काफी जुल्म किया था, इसके बावजूद बच्चों ने वंदे मातरम् मंत्र का महात्मय,अपनी ताकत से सिद्ध करने का प्रयास किया था।
बता दें कि तत्कालीन ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने वंदे मातरम को प्रतिबंधित कर दिया था, इसके बावजूद देशभक्ति से ओत-प्रोत युवा केशव बलिराम हेडगेवार जी ने अपने साथियों को एकजुट कर वंदे मातरम् का जोरदार जाप करवाया था, जिसके कारण उन्हें स्कूल से निष्कासित कर दिया गया था।
लेकिन हेडगेवार जी ने इसे गर्व के प्रतीक के रूप में अपनाया और बाद में उसी जोशीले राष्ट्रवाद को आगे बढ़ाने के लिए RSS की स्थापना की। इसलिए कांग्रेस, RSS को बदनाम करने की लाख कोशिश करे, लेकिन देश की जनता को अपने स्वयं सेवकों के योगदान प्रति अटूट विश्वास है, जिसे कांग्रेस कभी तोड़ नहीं सकती।
हमारे जांबाज सपूत बिना किसी डर के फांसी के तख्त पर चढ़ते थे और आखिरी सांस तक वंदे मातरम्… वंदे मातरम्… वंदे मातरम्… यही उनका उद्घोष रहता था।




