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राजनीति के शिकंजे में फंसी गढ़टकनेत ग्राम पंचायत, निकटवर्ती अजीतगढ़ से हटाकर 25–26 किमी दूर श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में किया गया शामिल

दैनिक राजस्थान समाचार संवाददाता — प्रदीप कुमार शर्मा गढ़टकनेत-अजीतगढ़। गढ़टकनेत ग्राम पंचायत इन दिनों प्रशासनिक परिसीमन को लेकर क्षेत्र में चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई है। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि महज 5 किलोमीटर दूर स्थित अजीतगढ़ पंचायत समिति से हटाकर गढ़टकनेत को 25–26 किलोमीटर दूर श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में जोड़ देना समझ से परे है।
जानकारी के अनुसार श्रीमाधोपुर पंचायत समिति में कुल 28 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है, जिनमें—
अणतपुरा, अरनिया, बागरियावास, भारणी, नांगल भीम, हांसपुर, जोरावर नगर, गढ़टकनेत, सिहोड़ी, करड़का, कल्याणपुरा, कंचनपुर, कोटड़ी सिमारला, लिसाड़िया, महरौली, मऊ, मूण्डरु, नांगल, नाथूसर, फुटाला, सिमारला जागीर, थोई, कल्याणपुरा थोई, झाड़ली, रामपुरा थोई, छीलावाली, शेरावाली, रतनपुरा, बड़ी ढ़ाणी, त्रिलोकपुरा और खुर्रमपुरा प्रमुख हैं।
वहीं अजीतगढ़ पंचायत समिति में 20 ग्राम पंचायतों को सम्मिलित किया गया है, जिनमें—
आसपुरा, दिवराला, हथौरा, जुगराजपुरा, हाथीदेह, हरदासकाबास, बुर्जा की ढाणी, जुगलपुरा, सांवलपुरा तंवरान, सांवलपुरा शेखावतान, चीपलाटा, सकराय, खटकड़, रायपुर जागीर, किशोरपुरा, टटेरा, पीथलपुर, दीपावास, मोकलवास झरिण्डा, टोड़ा और सुरानी शामिल हैं।
ग्रामीणों के अनुसार अजीतगढ़ की सबसे नज़दीकी ग्राम पंचायत गढ़टकनेत को तो दूरस्थ श्रीमाधोपुर में धकेल दिया गया, जबकि कई ऐसी पंचायतें जो अजीतगढ़ से दूरी पर स्थित हैं, उन्हें अजीतगढ़ समिति में शामिल किया गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि “यह परिसीमन व्यवहारिकता और भौगोलिक तर्कों के विपरीत है। यह निर्णय प्रशासनिक सुविधा की बजाय राजनीतिक हितों से प्रेरित लगता है। गढ़टकनेत ग्राम पंचायत पूरी तरह राजनीति के शिकंजे में जकड़ गई है।”
स्थानीय लोग इस निर्णय पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं, ताकि पंचायत समिति का निर्धारण दूरी एवं सुविधा के आधार पर किया जा सके।

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