
दैनिक राजस्थान समाचार न्यूज संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा गढटकनेत -अजीतगढ़। आसपुरा गांव की अनपढ़ महिला धापा देवी ने कभी सपने में भी यह नहीं सोचा होगा कि एक दिन उन्हें राष्ट्रपति के हाथों सम्मानित होने का सुअवसर मिलेगा।हाथ के हुनर ने उन्हें यह मुकाम हासिल कराया।घर पर लूम पर कालीन बनाना सीखा और इसके बाद अपनी कलात्मकता का परिचय कालीन बनाने में कर दिखाया।कालीन के कलात्मक डिजाइन तैयार किए और रैम्स के सहयोग से कला में निखार मिला।इसी उपलब्धि पर 55वर्षीया धापा देवी को मंगलवार को नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने सम्मानित किया। आसपुरा निवासी धापा देवी पत्नी भैंरुराम रैगर को दिल्ली में राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार समारोह में डिजाइन इनोवेशन अवार्ड से सम्मानित किया गया।धापा देवी पिछले 14वर्षों से जयपुर रैम्स से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने कौशल में कालीन के कई डिजाइन बनाने में योगदान दिया है। उन्हें यूरोपीय उत्पाद डिजाइन पुरस्कार और आइएफ डिजाइन पुरस्कार व डिजाइन इनोवेशन अवार्ड -2023से नवाजा गया है।यह विशिष्ट सम्मान विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) बाल मंत्रालय ,भारत सरकार के सौजन्य से प्रदान किया गया है।इनके जरिए भारतीय शिल्प विरासत को समकालीन डिजाइन दृष्टि के साथ जोड़ने का काम किया है। डिजाइन इनोवेशन अवार्ड उन सह-निर्मित परियोजनाओं को मान्यता देता है जहां शिल्पकार और डिजाइनर मिलकर पारम्परिक शिल्प कौशल पर आधारित नए बाजारोन्मुख डिजाइन विकसित करते हैं।यह पुरस्कार केवल तकनीकी निपुणता का ही सम्मान नहीं करता ,बल्कि रचनात्मक नवाचार, व्यावसायिक प्रासंगिकता और पारम्परिक कौशलों के आधुनिक डिजाइन मांगों के साथ संवेदनशील समावेश को भी महत्व देता है। पुरस्कार में नकद राशि,शॉल, प्रमाण-पत्र और ताम्रपत्र शामिल हैं।धापा देवी के पति भैंरुराम रैगर चिनाई कारीगर मिस्त्री का काम करते हैं। दम्पति के तीन बेटे हैं जो शिक्षित हैं। बुधवार शाम को अवार्ड लेकर आसपुरा आने पर महावीर, मूलचंद, अशोक,दीपक सहित अन्य लोगों ने धापा देवी का स्वागत -अभिनन्दन-सम्मान किया।



