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अजीतगढ़ के श्रीकृष्ण गौशाला प्रबंधन द्वारा अपनाए जा रहे नित नये-नये नवाचारों से गौसेवा कार्यों में दिनों-दिन हो रही बढ़ोतरी

दैनिक राजस्थान समाचार न्यूज संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा गढटकनेत -अजीतगढ़। अजीतगढ़ कस्बे की आजादी से पूर्व सन् 1945 में स्थापित श्रीकृष्ण गौशाला दिनों-दिन अपनी प्रतिष्ठा और सेवा कार्यों में बढ़ोतरी करती जा रही है जिसके पीछे श्रीकृष्ण गौशाला प्रबंधन की सुझबुझ और पारदर्शिता का विशेष योगदान रहा है।समय -समय पर दानदाताओं -भामाशाहों-गौसेवकों-गौरक्षकों का किया जाने वाला सम्मान,आम व्यक्ति की गौशाला तक पंहुच और कार्यकर्ताओं की निस्वार्थ भाव से की जाने वाली गौसेवा ने श्रीकृष्ण गौशाला को और अधिक लोकप्रियता हासिल करवादी है ।हरे चारे की पुलियां गौसेवकों को मात्र 10रुपये में उपलब्ध करवाने की मुहिम ने भी गौसेवकों एवं गौभक्तों की समस्या का निराकरण कर दिया है। ई-रिक्शा कस्बे भर में घूम-घूमकर। गौग्रास एकत्रित करता रहता है उससे भी लोगों द्वारा अप्रत्यक्ष रुप से गौसेवा होने लगी है‌ जन्मदिन, पुण्यतिथि,शादी की सालगिरह और महत्वपूर्ण उपलब्धियों पर गौसवामणी का आयोजन गौसेवा कार्यों के लिए मील का पत्थर साबित होने लगा है। नये नवाचार के तहत दानपात्र तैयार करवाए गए हैं जो दुकानों, प्रतिष्ठानों, संस्थानों, कार्यालयों, मकानों एवं सार्वजनिक स्थानों पर स्वेच्छा से स्थापित करवाते हैं । दान-पात्र भी बखूबी गौसेवा काम को अंजाम दे रहे हैं। दान-पात्र लगवाने के इच्छुक व्यक्ति को गौशाला प्रबंधन तक मेसेज करना पड़ता है कि वह दान-पात्र लगाने का इच्छुक है, गौशाला कार्यकर्ता स्वयं जाकर दान-पात्र लगाकर आते हैं।पर्व, त्योहार, अमावस्या एवं पूर्णिमा पर भी गौसेवा कार्यों की परम्परा काबिले-तारीफ रही है।आम आदमी से बिल्कुल जुड़ चुकी श्रीकृष्ण गौशाला अजीतगढ़ के खूबसूरत बनावट वाले गौसेवा दानपात्र हरेक की जुबान पर, हरेक की दुकान पर, हरेक के मकान पर, हरेक के प्रतिष्ठान पर एवं हरेक संस्थान पर दृष्टिगोचर होने लगे हैं। श्रीकृष्ण गौशाला की इन विभिन्न गतिविधियों से कस्बे और आसपास की गौमाताओं के दुर्दिन फिरते से प्रतीत होने लगे हैं । श्रीकृष्ण गौशाला के समुचित विकास, सेवा कार्यों, भौतिक संसाधनों एवं नित नये नवाचारों के लिए श्रीकृष्ण गौशाला प्रबंधन अध्यक्ष चैतन्य कुमार मीणा समेत सम्पूर्ण कार्यकारिणी को बारम्बार धन्यवाद, साधुवाद एवं बधाईयां।

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