ग्राम पंचायत बनाने की मांग पर हरिपुरा में ग्रामीण धरने पर बैठे: 5लोगों ने शुरू किया अनशन।

दैनिक राजस्थान समाचार न्यूज संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा गढटकनेत -अजीतगढ़। अजीतगढ़ पंचायत समिति में हरिपुरा को अलग ग्राम पंचायत बनाने की मांग को लेकर मंगलवार से हरिपुरा के ग्रामीणों ने दोपहर12.15बजे से हरिपुरा मोड़ पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था जिसका बुधवार को दूसरा दिन हो गया है।सरकार द्वारा गत दिनों पंचायत पुनर्गठन में हरिपुरा की मांग को नजर अंदाज करते हुए नवीन ग्राम पंचायत सुरानी का गठन कर हरिपुरा और शेरपुरा को उसमें शामिल करने से हरिपुरा के ग्रामीण आक्रोशित हैं। विरोध में पांच ग्रामीणों ने बेमियादी अनशन भी शुरू कर दिया है जिसका आज दूसरा दिन है। पूर्व सरपंच रतन सिंह , कैलाश शर्मा और दुर्गा प्रसाद ने बताया कि बुर्जा की ढ़ाणी ग्राम पंचायत का गांव हरिपुरा भौगोलिक स्थिति समेत कई पहलुओं से काफी अलग-थलग था। ग्रामीणों ने हरिपुरा को ग्राम पंचायत बनाए जाने के लिए आसपास के गांवों की अवस्थिति प्रदर्शित करते हुए अनेक प्रतिवेदन भेजे, लेकिन सरकार ने अनदेखी कर दी। ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को लम्बे समय से मांग-मांग पत्र दिए जाने के बावजूद सरकार ने हरिपुरा के बजाय सुरानी को ग्राम पंचायत मुख्यालय बना दिया।इसी अनदेखी के विरोध में मंगलवार से शुरू हुए इस बेमियादी धरना -प्रदर्शन में ग्रामीण आर-पार की लड़ाई लड़ने के मूड में हैं।यह अनशन गांव के अधिकारों और विकास के लिए किया जा रहा है। धरने के दौरान मूलचंद जांगिड़, राकेश शर्मा, दीपेन्द्र सिंह,महिपाल सिंह और शक्ति सिंह ने अनशन शुरू कर रखा है जिनका बुधवार को दूसरा दिन है।इस दौरान हनुमान सिंह,दलीप सिंह,मालसिंह, बनवारीलाल,श्रवण सिंह, नारायण सिंह,समुन्दर सिंह, सुरजभान शर्मा, शैतान मान,सुगाराम मान,सोहन सिंह, मामराज मीणा,गोलू राजपूत,शेर सिंह , वीरेंद्र सिंह,प्रमोद मीणा,छीतर जीतरवाल, हिम्मत सिंह, सुरेश शर्मा,जिताराम मीणा,गोपाल शर्मा समेत अनेक ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार ने हमारी वैध मांग की अनदेखी की है। पंचायत पुनर्गठन में की गई यह गलती ठीक होने तक हमारा संघर्ष जारी रहेगा।
बेमियादी अनशन एक गम्भीर कदम,किडनी पर होता है नेगेटिव असर- चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार बेमियादी अनशन एक गम्भीर कदम है, जिससे अनशनकारियों के स्वास्थ्य पर जल्द ही नकारात्मक प्रभाव पड़ना शुरू हो जाता है।लम्बे समय तक निर्जल व निराहार रहने से किडनी और अन्य अंगों को क्षति पंहुच सकती है।



