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नित्य ऐसा कुछ करो कि ठाकुर जी आप को अपना बना ले, या फिर आप ठाकुर जी के बन जाओ, भगवान जिनको अपना लेते है उसे छोड़ते नहीं

बिजयनगर संवाददाता तरनदीप सिंह
ब्यावर स्थानीय मसूदा रोड स्थित प्रभु की बगिया श्री जगन्नाथ भक्त मंडल के सान्निध्य में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के पंचम दिवस पर व्यास पीठ पर विराजित कथावाचक गौभक्त उमाशंकर दास महाराज अयोध्या वालो ने कथा के दौरान कहा कि कलयुग के प्रभाव से बचने के लिए ठाकुर को नियमित रूप से भजना चाहिए। महाराज ने कहा कि नित्य ऐसा कुछ करो कि ठाकुर जी आप को अपना बना ले, या फिर आप ठाकुर जी के बन जाओ, भगवान जिनको अपना लेते है उसे छोड़ते नहीं। प्रभु आपके हमारे कई नाते है। हम परमात्मा हम जीव है, हम पापी है आप पतित पावन हो। भागवत कथा दुर्लभ है। हम मनुष्य बने तब ही तो भगवत श्रवण का लाभ मिल रहा है। इस से भी बड़ी बात है कि हम भारत में जन्मे चीन में जन्म लेते तो क्या भागवत श्रवण होता। अगर नाम का आश्रय जीवन में पढ़ लिया तो समझिए सब पढ़ लिया। सभी शास्त्रों में नाम का बड़ा महत्व बताया गया है। भगवत नाम को भूलना नहीं चाहिए चाहे राम जपो या श्याम भव से हो जाए पार।
कथा के दौरान कृष्णदास महाराज वृंदावन, अनुराग महाराज बरसाना और केवल राम महाराज का भी आगमन हुआ। इस पर कथा व्यास पीठ विराजित उमा शंकर दास महाराज ने कहा कि अनुष्ठान या कथा में संत का आगमन हो जाए तो समझिए फल के बाग में और अधिक फल उत्पन्न हो गए। संतों की महिमा भगवान भी नहीं जानते। जब भी संत आते है अपने आचार्य का बल ले कर पधारते है। कथा की शोभा संतों से है। भागवत में पूतना का प्रसंग आने पर महाराज ने कहा पूतना ठाकुर को विष देने आई मगर ठाकुर ने यह जान कर भी अपमान पूतना पर भगवान की कृपा हुई । भगवान मारने वाले भी है और बचाने वाले भी। पूतना ने भगवान को दूध पिलाया चाहे वह विष भरा था।

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