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सीएसआर संस्था द्वारा पेहल गांव में जल संरक्षण कार्य की शुरुआत

दैनिक राजस्थान समाचार। प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाते हुए सीएसआर संस्था ने पेहल गांव के पंखा वाला जोहड़ के पुनरुद्धार कार्य की शुरुआत कर दी है। काम की प्रारंभिक गतिविधियों को औपचारिक रूप से आरंभ करते हुए 19/11/2025 को उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सीएसआर से डॉ नवीन कुमार विभागाध्यक्ष, महिला, जल एवं जलवायु परिवर्तन, अदिति कृष्णमूर्ति, इंटर्न, नसीब, फील्ड कॉर्डिनेटर, सेंटर फॉर सोशल रिसर्च सहित अनेक ग्रामीण भी उपस्थित रहे।
उद्घाटन समारोह की शुरुआत मुख्य अतिथियों को साफा और माला पहनाकर स्वागत करने के साथ की गई। कार्यक्रम में प्रशासक आशा मुकेश चौधरी भी उपस्थित रहे। ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं, को संबोधित करते हुए सीएसआर प्रतिनिधियों ने जोहड़ पुनरुद्धार के महत्व और इससे होने वाले सामुदायिक लाभों पर विस्तृत जानकारी साझा की। बताया गया कि इस कार्य में बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी, जिससे उन्हें न केवल रोजगार मिलेगा बल्कि जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
सीएसआर के डॉ नवीन कुमार ने उपस्थित महिलाओं और ग्रामीणों से सुझाव लेते हुए बताया कि संस्था द्वारा अलवर, खैरथल-तिजारा एवं बहरोड कोठपुतली ज़िलों में 20 से अधिक तालाब/जोहड़ों के पुनरुद्धार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें से कुछ का कार्य पूर्ण हो चुका है और शेष स्थलों पर जल्द ही कार्य प्रारंभ होगा। उन्होंने यह भी बताया कि सीएसआर संस्था महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य, शिक्षा और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय रूप से कार्य कर रही है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र चौधरी, ग्राम विकास अधिकारी, पेहल ग्राम पंचायत ने कहा कि आज दुनिया गंभीर जल संकट का सामना कर रही है, ऐसे में पेहल गांव में जोहड़ पुनर्जीवन का यह प्रयास अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सीएसआर संस्था द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की, कि आने वाले समय में भी इसी प्रकार के जल संरक्षण कार्य निरंतर गति से जारी रहेंगे।
सीएसआर के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि महिलाओं द्वारा किया गया कार्य सदैव दीर्घकालिक और प्रभावी होता है, क्योंकि वे हर कार्य को अपनी जिम्मेदारी और समर्पण से करती हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि संस्था भविष्य में भी क्षेत्र में जल संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम निरंतर चलाती रहेगी।

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