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समुचित विकास की बाट जोह रहे अरावली पर्वतमाला में स्थित पांचों धाम

दैनिक राजस्थान समाचार न्यूज संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा गढटकनेत -अजीतगढ़। टपकेश्वर,बालेश्वर,गणेश्वर,थानेश्वर एवं बागेश्वर धाम धार्मिक आस्था, चमत्कार व इतिहास से जुड़े ऐसे धाम हैं जिन्हें विकास की सख्त दरकार है।अरावली पर्वतमाला की शांत वादियों में बसे नीमकाथाना उपखंड क्षेत्र के ये पांचों प्राचीन शिव धाम आज भी धार्मिक आस्था और रहस्य के केंद्र बने हुए हैं। महाशिवरात्रि हो या पवित्र सावन मास ,इन पावन धामों पर हजारों श्रद्धालु एवं भक्तगण बम-बम भोले के जयकारों के साथ जलाभिषेक करने पंहुचते हैं। सदियों पुरानी कथाओं, प्राकृतिक चमत्कारों और पौराणिक महत्व से समृद्ध ये धाम पर्यटन मानचित्र पर चमक सकते हैं, बशर्ते इन्हें विकास के पंख लग जाएं। इन पांचों धामों की वर्तमान स्थिति यह है कि इन धामों पर शौचालय, मूत्रालय, विश्राम स्थल, साफ-सफाई और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं का भी नितांत अभाव है।पुरातत्व व पर्यटन विभाग की उदासीनता के कारण यहां आने वाले श्रद्धालुओं एवं भक्तगणों को परेशानियों से ही गुजरना पड़ता है। क्षेत्रवासियों के कथनानुसार यदि सरकार समुचित विकास करना दे तो धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है और धामों के स्थानीय युवाओं के रोजगार के अवसर भी सृजित हो सकते हैं।और तो और अरावली की इन वादियों में दुर्लभ वन्यजीव भी बहुतायत में मौजूद हैं, जिनके संरक्षण के लिए पैंथर रिजर्व की सम्भावनाएं तलाशी जा सकती है। टपकेश्वर धाम- महाभारत काल से जुड़ी टपकेश्वर धाम की कथा आज भी लोगों को आकर्षित करती है।माना जाता है कि पांडवों के अज्ञातवास के दौरान महाबली भीम ने अपनी गदा से गुफा का निर्माण किया था‌ जिसके भीतर प्राचीन शिवमूर्ति स्थापित है। बारिश के दिनों में गुफा की छत से टपकते जल से भगवान शिव का स्वयं जलाभिषेक होता रहता है जिसे श्रद्धालु एवं भक्तगण चमत्कार मानते हैं। बालेश्वर धाम- बालेश्वर धाम का शिवलिंग आस्था और आश्चर्य का अनूठा संगम है। स्थानीय लोगों के अनुसार साढ़े तेरह फीट खुदाई के बाद भी शिवलिंग का दूसरा छोर नहीं मिला।खुदाई रोकनी पड़ी क्योंकि अचानक मधुमक्खियों ने हमला कर दिया। मंदिर परिसर के पीछे गुलर की जड़ों के बीच स्थित एक प्राचीन कुंड से निरंतर पानी बहता रहता है।यह पानी कहां से आता है,आज तक कोई नहीं जान पाया,इसी रहस्य ने इसे चमत्कारिक धाम बना दिया। गणेश्वर धाम- ताम्रकालीन संस्कृति के लिए विख्यात गणेश्वर धाम प्राकृतिक गर्म जलधारा के लिए जाना जाता है। यहां सदियों से तापमान माइनस में पंहुच जाता है फिर भी गौमुख से वर्षभर गर्म जलधारा बहती रहती है ‌पुरातत्वविदों को यहां ताम्रकार के अवशेष विशेषकर मछली पकड़ने का कांटा भी मिला है,जो इस धाम की ऐतिहासिक महत्ता को साबित करता है। ज्ञानेश्वर एवं बागेश्वर- अरावली की हरी-भरी वादियों में स्थित ज्ञानेश्वर और बागेश्वर धाम भी आस्था के प्रमुख केन्द्र हैं। महाशिवरात्रि और सावन माह में यहां श्रद्धालुओं एवं भक्तगणों का सैलाब उमड़ता है। दोनों ही धामों से प्राचीन काल की कथाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें भगवान शिव के चमत्कार और स्थानीय जनजीवन से जुड़े प्रसंग शामिल हैं। नीमकाथाना क्षेत्र के प्रसिद्ध गणेश्वर, टपकेश्वर, बालेश्वर,बागेश्वर और थानेश्वर सहित अनेक तीर्थ स्थलों की यदि सरकार और पर्यटन विभाग सुध ले तथा इनके विकास के लिए पर्याप्त बजट आवंटित किया जाए तो यहां होटल और धर्मशालाओं का निर्माण सम्भव हो सके। इससे श्रद्धालुओं एवं भक्तगणों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिल सके और स्थानीय युवा लोगों को रोजगार के नये अवसर मिल सकें।संत गगन गिरि महाराज -गणेश्वर धाम।

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