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आसींद में प्रशासनिक फेरबदल, विधायक जब्बर सिंह सांखला के प्रयासों से ‘शंभूगढ़’ बनी नई पंचायत समिति

​आसींद संवाददाता विजयपाल सिंह राठौड़
राजस्थान सरकार ने भीलवाड़ा जिले में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और स्थानीय शासन को सुगम बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। पंचायती राज विभाग द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना (दिनांक 24.12.2025) के अनुसार, जिले में शंभूगढ़ को नई पंचायत समिति के रूप में गठित किया गया है, वहीं आसींद पंचायत समिति का पुनर्गठन किया गया है।
​विधायक जब्बर सिंह सांखला के प्रयासों को मिली सफलता
​क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने में आसींद-हुरड़ा विधायक जब्बर सिंह सांखला की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विधायक सांखला के निरंतर प्रयासों और राज्य सरकार के समक्ष मजबूती से पक्ष रखने के बाद ही शंभूगढ़ को स्वतंत्र पंचायत समिति का दर्जा मिल सका है। इस निर्णय से क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और आमजन में भारी उत्साह है और उन्होंने इसे विधायक की बड़ी उपलब्धि बताया है।
​1. नई पंचायत समिति: शंभूगढ़
​शंभूगढ़ को नई पंचायत समिति का दर्जा देते हुए इसमें कुल 24 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है। इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं:
​शंभूगढ़ (मुख्यालय), आमेसर, बरसनी, गांगलास, ईरास, कालियास, रूपपुरा, मोतीपुर, परासोली, जोधड़ास, दूल्हेपुरा, रामपुरिया, धोली जेतपुरा, मोटरास, आकड़सादा, जगपुरा, संग्रामगढ़, रायरा, जयनगर, बारणी, दांतड़ा, फलामादा, सोडार और उंखलिया।
​2. पुनर्गठित पंचायत समिति: आसींद
​आसींद पंचायत समिति के कार्यक्षेत्र को फिर से निर्धारित किया गया है। अब इसके अधिकार क्षेत्र में कुल 27 ग्राम पंचायतें शामिल होंगी, जिनमें प्रमुख हैं:
​आसींद (मुख्यालय), बरणा, बोरेला, ब्राह्मणों की सरेरी, दांतड़ा, दड़ावट, दौलतगढ़, जालरिया, जिन्द्रास, कांवलियास, करजालिया, कटार, लाछूड़ा, मोड़ का निम्बाहेड़ा, नेगड़िया, पालड़ी, रघुनाथपुरा, रतनपुरा (ला), तिलोली, सुलवाड़ा, बामणी, पाण्डरू, जीवंलिया, झालरा, राजपुरा, मालासेरी, रूपपुरा (ब) और बागमली।
​विकास को मिलेगी नई गति
​यह निर्णय पूर्व में जारी अधिसूचनाओं में लिपिकीय त्रुटियों को सुधारने और प्राप्त अभ्यावेदनों के निस्तारण के बाद लिया गया है। सरकार द्वारा स्पष्ट किया गया है कि इन नई और पुनर्गठित पंचायत समितियों का अस्तित्व आगामी चुनाव के बाद प्रभावी होगा। शंभूगढ़ के अलग पंचायत समिति बनने से अब स्थानीय निवासियों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए लंबी दूरी तय नहीं करनी होगी और विकास कार्यों में पारदर्शिता व गति आएगी।

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