
दैनिक राजस्थान समाचार (पंकज बाफना)अजमेर जिला बार एसोसिएशन अजमेर के चुनावों में डॉ.योगेंद्र ओझा ने अध्यक्ष पद पर ऐतिहासिक मतों से विजय प्राप्त की है।
चार दावेदारों के मुकाबले में उनकी यह पहली कोशिश ही सफल साबित हुई,जो बार के वकीलों के बीच उनकी स्वीकार्यता को दर्शाती है।मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के बीच उभरे विजेता चुनावी दंगल में अजय त्रिपाठी दो बार पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं,जबकि सत्यनारायण हावा और राजेंद्र सिंह राठौड़ दोनों ही पहले उपाध्यक्ष पद संभाल चुके हैं। इन अनुभवी उम्मीदवारों के बावजूद डॉ.ओझा की दबंग छवि ने वकीलों का दिल जीत लिया।
वर्तमान परिस्थितियों में अजमेर बार को सशक्त नेतृत्व की सख्त जरूरत थी,जो उनकी जीत का मुख्य कारण बनी।जिला जज के फैसले से भड़का वकीलों का आक्रोश हाल ही में जिला न्यायाधीश द्वारा नई बिल्डिंग में सभी कोर्ट शिफ्ट करने और वकीलों की बैठने की व्यवस्था सुधारने से पहले उद्घाटन करने पर अधिवक्ताओं में जबरदस्त रोष फैल गया।न्यायाधीश ने आक्रोश दबाते हुए तानाशाही रवैया अपनाया और वकीलों की टेबलें भी हटा दीं।इस आंदोलन में चारों उम्मीदवार मौजूद थे,लेकिन डॉ.ओझा की दबंगाई और उनकी युवा टीम के प्रचार ने वकीलों के मान-सम्मान की रक्षा का वादा किया,जो निर्णायक साबित हुआ। डॉ.योगेंद्र ओझा की जीत वकीलों का आक्रोश है, जिन्होंने सशक्त नेतृत्व चुनकर अपनी आवाज बुलंद की। यह परिणाम बार की एकजुटता और बदलाव की मांग को रेखांकित करता है और निश्चित तौर पर युवा अधिवक्ताओं ने अपने मान सम्मान व स्वाभिमान को बरकरार रखने के लिए डॉ.योगेंद्र ओझा का चयन किया है।




