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गायत्री शक्तिपीठ, अजीतगढ़ का छठवां पाटोत्सव हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।

दैनिक राजस्थान समाचार न्यूज संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा गढटकनेत -अजीतगढ़ गायत्री शक्तिपीठ, अजीतगढ़ का छठवां पाटोत्सव वयोवृद्ध शिक्षाविद् घनश्याम पारीक के संरक्षण में एवं संयोजक गोविन्द नारायण शर्मा के कुशल सान्निध्य में हर वर्ष की भांति बुधवार को हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया।गायत्री मंदिर को गर्भगृह सहित लाइट डेकोरेशन, पुष्प मालाओं एवं गुब्बारों से दुल्हन की तरह सजाया गया। प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले पाटोत्सव उत्सव पर सुबह 9बजे से 11.30बजे तक पंच कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया गया,दोपहर 12.30बजे से कन्याओं को पवित्र भोज कराया गया और दोपहर 1बजे से सामूहिक प्रसाद वितरण का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। गायत्री महायज्ञ में अनेकानेक लोगों ने आहुतियां देकर घर-परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामनाएं की । श्रद्धालुओं , भक्तगणों का उत्साह सातवें आसमान पर दिखाई दिया । ‌ संस्कार स्कूल के नन्हे-मुन्ने बालक-बालिकाओं ने गायत्री महामंत्र का सस्वर वाचन करके कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बना दिया। चारों तरफ माता गायत्री की उपासना में महिलाएं और पुरुष दत्तचित्त दिखाई दिए।इस अवसर पर देवेंद्र सिंह बड़गुर्जर, दिनेश भादूका सहित समस्त गायत्री परिवार के सदस्य एवं साधकगण उपस्थित रहे। गायत्री परिवार के पुरुषोत्तम खण्डेलवाल ने बताया कि शांतिकुंज हरिद्वार के संस्थापक एवं संरक्षक परम पूज्य गुरुदेव पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य के मतानुसार मानव एवं अन्य समस्त जीवों में चार चीजें समान होती हैं।आहार,विहार,भय एवं मैथुन, किंतु मनुष्य योनि ही ऐसी है जिसमें गायत्री मंत्र का नित्य जप करके हमेशा -हमेशा के लिए सांसारिक बंधनों से मुक्त हुआ था सकता है।गायत्री मंत्र एक ऐसा शक्तिशाली मंत्र है जिसका विधिवत् जप करने से निर्वाण,कैवल्य अथवा मोक्ष प्राप्त किया जा सकता है।मानव शरीर के तीन प्रकार बताए गए हैं – स्थूल शरीर जो पंच तत्वों यानि अग्नि,जल,वायु, पृथ्वी एवं आकाश से बना होता है।दूसरा सूक्ष्म शरीर जो मन, बुद्धि, अहंकार, एवं चित्त से बोधित होता है।तीसरा मारण शरीर जिससे ईश्वर में आनंद की प्राप्ति होती है जिसे आत्मा भी कहा जाता है । तीनों शरीरों में से गुरुदेव ने कहा है कि एक मात्र मारण शरीर द्वारा आत्मा से परमात्मा को जोड़कर उस पर ब्रह्म का साक्षात्कार किया जा सकता है जिसका एकमात्र माध्यम गायत्री मंत्र है। संरक्षक वयोवृद्ध शिक्षाविद् घनश्याम पारीक एवं संयोजक गोविन्द नारायण शर्मा ने सभी आगंतुकों का गायत्री शक्तिपीठ अजीतगढ़ में हार्दिक स्वागत -अभिनन्दन-सम्मान किया।

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