
दैनिक राजस्थान समाचार न्यूज संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा गढटकनेत -अजीतगढ़। अरावली पर्वतमाला को लेकर जो निर्णय आया है उस निर्णय के बाद अब सरकारें खनन के लिए खानों का आबंटन शुरू कर देंगी तो पुरानी पर्वत श्रेणियां नष्ट हो जाएंगी। इसलिए इस पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।यह विचार राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सचिव बालेंदू सिंह शेखावत ने रखे हैं। प्रदेश एनएसयूआई के महासचिव अरुण शर्मा का कहना है कि अरावली कोई पहाड़ नहीं ,यह सांसों की दीवार,जीवन का कवच है,अगर अरावली टूटी तो कल का भारत सूखा और असहाय होगा,अरावली को बचाना देश को बचाने जैसा ही है। लोगों की मांग है कि अरावली पर्वतमाला पर किसी भी प्रकार के खनन की अनुमति ना दी जाए क्योंकि इन अरावली पहाड़ियों पर दर्जनों की संख्या में बड़े एवं विख्यात मंदिर अवस्थित हैं।अरावली की पहाड़ियों पर श्री जगदीश स्वामी,काली माता,ब्रह्माणी माता,गुड़ला बालाजी मंदिर,वीर हनुमान मंदिर, पच्चीस पापड़ा हनुमान मंदिर,शिव मंदिर,अम्बा माता मंदिर सरीखे अनेकानेक मंदिर सैकड़ों वर्षों से बने हुए हैं और लोगों की आस्था के केंद्र हैं। यदि 100मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली श्रेणी में नहीं माना जाता है तो इन पहाड़ियों पर लीज आबंटित होती है तो रेगिस्तान का विस्तार होगा, वनस्पति नष्ट होगी,मानसून पर प्रभाव पड़ेगा, जंगली जानवरों का पलायन होगा, पर्यावरण प्रदूषित होगा, धूल-मिट्टी का विस्तार होगा। नये आदेशों के तहत अगर अरावली पहाड़ी की ऊंचाई 100मीटर से ज्यादा ऊंचाई की होगी तो उन पहाड़ियों को अरावली श्रेणी में माना जाएगा, लेकिन अगर पहाड़ी 100मीटर से नीचे की ऊंचाई की रहेगी तो उसे अरावली पहाड़ी क्षेत्र नहीं माना जाएगा।ऐसी पहाड़ी को अरावली का हिस्सा नहीं मानते हुए उस पर खनन के लिए लीज आबंटित हो सकती है।ऐसे में अजीतगढ़ क्षेत्र की 40प्रतिशत अरावली पहाड़ियां ऐसी हैं जिनकी ऊंचाई 100मीटर से कम हैं।ऐसे में अजीतगढ़ क्षेत्र के लोगों एवं जनप्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अरावली पर्वत श्रेणी पर किसी भी प्रकार के खनन की अनुमति ना दी जाए। जानकारी के अनुसार अजीतगढ़ क्षेत्र में नीमकाथाना से अजीतगढ़,अमरसर (जयपुर) जिले की काली माता मंदिर पहाड़ी,सामोद(जयपुर) के वीर हनुमान जी मंदिर,नानाजी मंदिर,ब्रह्माणी मंदिर,थोई-कांवट के मंदिर, जगदीश स्वामी मंदिर,झाड़ली -नारे-रायपुरजागीर-टोडा-हथौरा-पीथलपुर पहाड़ी क्षेत्र अरावली पर्वत श्रेणी के अधीन आता है।इस क्षेत्र की 60प्रतिशत पहाड़ियां हीअरावली पर्वतमाला के अधीन आती हैं। केंद्र सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए जिससे राजस्थान के सौन्दर्य की निशानी अरावली पर्वतमाला का अस्तित्व बच सके।




