
गढ़टकनेत में निर्माणाधीन ईंट-भट्टे को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश, जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
दैनिक राजस्थान समाचार संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा, गढटकनेत-अजीतगढ़। गढ़टकनेत ग्राम पंचायत के आसपुरा मोड़ पर स्थित ब्रह्मलीन परम अघोरी संत कालीदास महाराज के मंदिर के पीछे बनाए जा रहे मिट्टी के ईंट-भट्टे को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, सीकर को ज्ञापन सौंपकर ईंट-भट्टे के निर्माण कार्य को तुरंत प्रभाव से रुकवाने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप — बिना अनुमति और नियमों की अनदेखी
ग्रामीणों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि ईंट-भट्टे का निर्माण सरकारी नियमों को ताक पर रखकर और बिना आवश्यक पर्यावरणीय स्वीकृति के किया जा रहा है। बताया गया कि रात के समय कई किलोवाट की रोशनी जलाकर भट्टे का निर्माण तेज़ी से कराया जा रहा है, जिससे लोगों में भय और असंतोष बढ़ रहा है।
महत्वपूर्ण स्थलों के पास निर्माण पर आपत्ति
ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया कि—
निर्माण स्थल के करीब 250 मीटर की दूरी पर आंगनबाड़ी केंद्र है।
पास में ही ब्रह्मलीन परम अघोरी संत कालीदास महाराज का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है।
एक निजी स्कूल भी निकट ही संचालित हो रही है।
लगभग 200 मीटर दूर बच्चों का खेल मैदान है, जहाँ रोजाना सैकड़ों बच्चे आते-जाते हैं।
पास ही पशु चिकित्सा उप केंद्र भी कार्यरत है।
ग्रामीणों के अनुसार, ईंट-भट्टा चालू होने पर इन सभी स्थानों के आसपास पर्यावरण प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे स्थानीय निवासियों, बच्चों और पशु-पक्षियों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
आबादी क्षेत्र में बढ़ता खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि आसपास सैकड़ों की संख्या में घर बसे हुए हैं और अनेक परिवार व पशु-पक्षी इस क्षेत्र में अपना जीवन-यापन कर रहे हैं। ऐसे में ईंट-भट्टे का संचालन क्षेत्र के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि भट्टा संचालकों ने प्रशासन को गुमराह कर गलत जानकारी प्रदान की है।
प्रशासनिक कार्रवाई का अभाव, बढ़ा आक्रोश
ग्रामीणों का कहना है कि इस संबंध में कई बार अधिकारियों को शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे लोगों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर से तत्काल प्रभाव से निर्माणाधीन ईंट-भट्टे को बंद कराने और आवश्यक जांच करवाने की मांग की है।
ग्रामीणों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है और वे जल्द ही बड़े आंदोलन की चेतावनी भी दे रहे हैं।




