
दैनिक राजस्थान समाचार संवाददाता: प्रदीप कुमार शर्मा, गढ़टकनेत–अजीतगढ़
अजीतगढ़। बाहर से किसी बड़े रैफरल अस्पताल की तरह नजर आने वाला अजीतगढ़ स्थित बाबा नारायणदास राजकीय उप जिला अस्पताल इन दिनों गंभीर चिकित्सक अभाव की समस्या से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि जहां पहले अस्पताल की ओपीडी 1400 से 1600 तक पहुंचती थी, वह अब घटकर लगभग 700 मरीजों तक सिमट गई है।
चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को समुचित एवं समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सा विभाग एवं जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का ही परिणाम है कि आसपास के चार–पांच दर्जन गांवों की चिकित्सा जरूरतों को पूरा करने वाला यह प्रमुख अस्पताल बदहाली की स्थिति में पहुंच गया है।
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में कुल 22 चिकित्सक पद स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में केवल 12 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। इनमें फिजिशियन, चेस्ट फिजिशियन, शिशु रोग विशेषज्ञ, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, नाक–कान–गला (ईएनटी) रोग विशेषज्ञ, तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ, दो दंत रोग विशेषज्ञ तथा कुछ मेडिकल ऑफिसर्स शामिल हैं। इनमें से एक स्त्री रोग विशेषज्ञ लंबे समय से मातृत्व अवकाश पर हैं, जिससे सेवाएं और प्रभावित हो रही हैं।
कई बार तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि अस्पताल में मात्र दो से तीन डॉक्टर ही मौजूद रहते हैं। 14 से 18 दिसंबर तक की ओपीडी संख्या 230 से 1076 के बीच रही, जबकि पूर्व में यह आंकड़ा 1500 तक पहुंच जाया करता था। मजबूरी में अब मरीज निजी अस्पतालों का रुख करने लगे हैं।
माकपा नेता ओमप्रकाश यादव, जनवादी नौजवान सभा के अनिल यादव, युवा कांग्रेसी नेता लखन पारीक एवं विक्रम सिंह बांकावत ने आरोप लगाया कि अधिकारी समय-समय पर अस्पताल का निरीक्षण तो करते हैं, लेकिन रिक्त पदों को भरने को लेकर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र ही चिकित्सकों के पद नहीं भरे गए तो आंदोलन किया जाएगा।
इस संबंध में अस्पताल के पीएमओ डॉ. मनीष जांगिड़ ने बताया कि चिकित्सकों के पद रिक्त हैं, जिससे निश्चित रूप से परेशानी हो रही है। विभाग को इस बारे में कई बार अवगत कराया जा चुका है। पद भरना सरकार एवं चिकित्सा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की कमी के बावजूद भी अस्पताल में आने वाले किसी भी मरीज को बिना उपचार के नहीं लौटाया जाता।



