
दैनिक राजस्थान समाचार न्यूज संवाददाता प्रदीप कुमार शर्मा गढटकनेत अजीतगढ़ पंचायत समिति के राजस्व गांव हरिपुरा को पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने व 5व्यक्तियों द्वारा किए जा रहे अनशन के दूसरे दिन बुधवार को दो अनशनकारियों की तबियत बिगड़ गई थी। सूचना पर चिकित्सकीय टीम ने स्वास्थ्य परीक्षण करके दवाईयां दी लेकिन अनशनकारियों ने कोई भी दवा लेने से साफ इंकार कर दिया। ग्रामीण बबलू सिंह हरिपुरा, सेवानिवृत्त प्राचार्य कैलाश शर्मा, मामराज मीणा,हिम्मत सिंह आदि ग्रामीणों ने बताया कि हरिपुरा को नई ग्राम पंचायत बनाने की मांग लम्बे समय से की जाती रही है ।गत दिनों यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा को ज्ञापन देकर गांव वालों ने मांग की थी लेकिन इसके बावजूद कोई सुनवाई नहीं की गई। हरिपुरा को पंचायत पुनर्गठन में ग्राम पंचायत बनाए जाने के बजाय नवगठित ग्राम पंचायत सुरानी के अधीन कर दिया गया। इससे गुस्साए ग्रामीणों द्वारा मंगलवार से अनिश्चितकालीन धरना व 5लोगों द्वारा अनशन करके पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग की जा रही है। धरना -प्रदर्शन एवं अनशन के दूसरे दिन बुधवार को अनशनकारी मूलचंद जांगिड़ एवं राकेश शर्मा की अचानक तबियत बिगड़ गई। बीपी एवं शुगर की समस्या सामने आई। प्रशासन को अवगत करवाने के बाद अजीतगढ़ बीसीएमएचओ डॉ राजेन्द्र यादव ने हरदासकाबास राजकीय अस्पताल चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ अजय सामोता के नेतृत्व में चिकित्सा टीम को अनशन स्थल पर भेजा।टीम ने अनशन कर रहे पांचों जनों का मेडिकल चेकअप किया जिसमें मूलचंद जांगिड़ एवं राकेश शर्मा के बीपी एवं शुगर की समस्या का पता चला।अन्य अनशनकारियों की भी सेहत बिगड़ने का खतरा बताया। चिकित्सा टीम ने इन सभी को दवाईयां दी, लेकिन अनशनकारियों ने दवाई लेने से साफ मना कर दिया।
अजीतगढ़ ब्लॉक के मुख्य ब्लॉक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ राजेन्द्र यादव का कहना है कि सूचना पर उन्होंने हरदासकाबास राजकीय अस्पताल की चिकित्सा टीम को भेज कर अनशनकारियों का मेडिकल चेकअप कराया। अनशनकारियों की चेतावनी – मांग नहीं मानी गई तो दवाईयां भी नहीं लेंगे। हरिपुरा को पंचायत मुख्यालय बनाने की मांग के लिए अनशन में बिगड़ी दो जनों की तबियत के बाद चिकित्सकीय टीम द्वारा दवाईयां दी गई लेकिन अनशनकारियों ने कहा कि जब तक मांग नहीं मानी जाएगी तब तक दवाईयां नहीं लेंगे। चिकित्सा टीम ने बताया कि अगर अनशनकारी कुछ सेवन नहीं करेंगे तो उनका स्वास्थ्य दिन-प्रतिदिन बिगड़ता जाएगा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि इसके बाद भी प्रशासन का कोई जिम्मेदार अधिकारी अभी तक अनशन स्थल पर नहीं पंहुचा है।



